

गौरव श्रीवास्तव/अमन गुप्ता,आजमगढ़। पहुंचे एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने मीडिया से बातचीत में इंडिया गठबंधन, आगामी विधानसभा चुनाव और युवाओं के आंदोलन को लेकर कई बड़े बयान दिए। उन्होंने एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के “आज वक्त है, बात कर लो, बाद में रोना नहीं” वाले बयान का समर्थन करते हुए कहा कि उनकी पार्टी की ओर से इंडिया गठबंधन के लिए यह चेतावनी भी है और ऑफर भी।शौकत अली ने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां एआईएमआईएम ने तेजस्वी यादव से केवल पांच सीटों की मांग की थी, लेकिन गठबंधन में उन्हें जगह नहीं दी गई। बाद में विपक्ष ने एआईएमआईएम पर वोट काटने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भी उनकी पार्टी चाहती है कि समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल मिलकर चुनाव लड़ें ताकि भाजपा को रोका जा सके।उन्होंने स्पष्ट किया कि एआईएमआईएम को सीटों को लेकर कोई विवाद नहीं है। यदि विपक्ष सहमति बनाता है तो उनकी पार्टी सरकार या कैबिनेट में शामिल होने का दावा भी नहीं करेगी। हालांकि, यदि गठबंधन नहीं बनता है तो एआईएमआईएम उत्तर प्रदेश की 200 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है और बाकी 203 सीटें अन्य विपक्षी दलों के लिए छोड़ सकती है।दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों और युवाओं के आंदोलन का जिक्र करते हुए शौकत अली ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद पहली बार मोदी सरकार के खिलाफ इतना बड़ा गैर-राजनीतिक युवा आंदोलन देखने को मिला। उन्होंने कहा कि पेपर लीक से परेशान युवाओं ने लगभग एक महीने तक संघर्ष किया और अंततः सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया।पेपर लीक कानून पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि केवल कानून बना देने से अपराध नहीं रुकते, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन और समाज में जागरूकता जरूरी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ विपक्षी दल इस आंदोलन का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन युवाओं ने आंदोलन को गैर-राजनीतिक और एकजुट बनाए रखा।शौकत अली ने कहा कि युवाओं के दबाव के कारण ही प्रधानमंत्री को इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देनी पड़ी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सबसे बड़ी ताकत जनता की होती है और युवा जिस दिशा में आगे बढ़ते हैं, वही देश में बदलाव की दिशा तय करते हैं।
