

गौरव श्रीवास्तव/अमन गुप्ता,आजमगढ़। महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय के रांगेय राघव शोधपीठ की ओर से शनिवार को हरिऔध कला भवन में राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘जाग उठ मेरे हिंदुस्तान’ का आयोजन किया गया। मुख्य सार्वजनिक सत्र में भारतीय सभ्यता, संस्कृति, साहित्य और युवा शक्ति की भूमिका पर वक्ताओं ने विचार रखे।मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने कहा कि भारत की पहचान केवल 1947 से नहीं, बल्कि हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान परंपरा से है। उन्होंने युवाओं से अपनी जड़ों, इतिहास और महापुरुषों को समझने तथा उनके विचारों को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया।पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने कहा कि “हमें किसी और को जगाने से पहले स्वयं जागना होगा—अपने भारत, अपनी सभ्यता और अपनी ज्ञान परंपरा के लिए।” उन्होंने जातिगत विभाजन से ऊपर उठकर कर्म, योग्यता और सामाजिक एकता को महत्व देने की बात कही।रांगेय राघव के साहित्य पर चर्चा करते हुए शोधपीठ के प्रभारी प्रो. सुजीत कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि रांगेय राघव ने 150 से अधिक पुस्तकों के माध्यम से समाज, संस्कृति और राष्ट्र से जुड़े सवालों को स्वर दिया। उनकी रचनाओं में राष्ट्रजागरण और सामाजिक चेतना का स्पष्ट स्वर दिखाई देता है।पूर्व कुलपति प्रो. संजीत गुप्ता ने कहा कि राष्ट्रनिर्माण केवल सरकार या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के कर्तव्य और जिम्मेदारी से जुड़ा विषय है। वहीं विभाग प्रचारक दीनानाथ ने भारतीय जीवन-मूल्यों, स्वावलंबन और सांस्कृतिक आत्मविश्वास को मजबूत करने पर जोर दिया।संगोष्ठी की अध्यक्षता प्रो. वंदना पाण्डेय ने की। कार्यक्रम में रांगेय राघव शोधपीठ की पुस्तक का विमोचन भी किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शोधार्थी, शिक्षक और नागरिक मौजूद रहे।
