

गौरव श्रीवास्तव/अमन गुप्ता,आजमगढ़। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और निजामाबाद विधानसभा से लगातार पांच बार विधायक रहे आलम बदी का 92 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके निधन से न सिर्फ समाजवादी पार्टी, बल्कि पूरे आजमगढ़ की राजनीति में एक ऐसा अध्याय समाप्त हो गया, जिसकी पहचान सादगी, ईमानदारी और जनसेवा से थी। आलम बदी उन चुनिंदा नेताओं में गिने जाते थे, जिनकी राजनीति सत्ता या दिखावे के बजाय जनता की सेवा पर आधारित रही। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में हमेशा सादगीपूर्ण जीवनशैली अपनाई। बड़े काफिलों और आलीशान गाड़ियों के बजाय वे अक्सर सामान्य वाहन से ही चलते थे। उनकी सादगी का सबसे चर्चित उदाहरण तब सामने आया, जब वह स्कूटी से उत्तर प्रदेश विधानसभा पहुंच गए थे। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ और लोगों ने उनकी सादगी की जमकर सराहना की। उस घटना ने यह संदेश दिया कि जनप्रतिनिधि का सम्मान उसकी कार्यशैली से होता है, न कि उसके काफिले से। आलम बदी की ईमानदारी भी उनकी सबसे बड़ी पहचान थी। क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर वे बेहद सख्त रहते थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, कोई भी ठेकेदार बिना गुणवत्ता के काम करने की हिम्मत नहीं करता था। यदि किसी विकास कार्य में भ्रष्टाचार या अनियमितता की शिकायत मिलती, तो वह तत्काल कार्रवाई कराने में पीछे नहीं हटते थे। यही कारण था कि उन्हें एक निष्पक्ष और ईमानदार जनप्रतिनिधि के रूप में सम्मान मिला।लगातार पांच बार निजामाबाद विधानसभा का प्रतिनिधित्व करने वाले आलम बदी ने अपने व्यवहार, सरल स्वभाव और जनसरोकारों से जनता के बीच गहरी पहचान बनाई। उनके निधन से समाजवादी पार्टी ने एक अनुभवी और ईमानदार नेता खो दिया है, वहीं आजमगढ़ की राजनीति ने जनसेवा और सादगी की एक ऐसी मिसाल खो दी है, जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा।
