झोपड़ी से पीएचडी तक पहुँचा आजमगढ़ का युवक, रक्षा अनुसंधान से बढ़ाएगा देश की ताकत

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गौरव श्रीवास्तव/अमन गुप्ता,आजमगढ़। महराजगंज ब्लॉक के देवारा कदीम (करीया का पूरा) गांव के एक युवक ने अभावों और कठिन परिस्थितियों को मात देकर रसायन विज्ञान में पीएचडी शोधार्थी बनकर जिले का नाम रोशन किया है। उनका शोध भारत के मिसाइल, नौसेना और एयरोस्पेस प्लेटफॉर्म की सुरक्षा और क्षमता बढ़ाने से जुड़ा है।बताया जाता है कि युवक का जन्म 12 अगस्त 1996 को एक अत्यंत गरीब परिवार में हुआ था। उनके पिता मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे और कभी ऊँट पर बालू व अनाज ढोकर घर चलाते थे। पारिवारिक विवाद के बाद माता-पिता को अलग कर दिया गया और परिवार को झोपड़ी में रहना पड़ा। गांव में आर्थिक स्थिति को लेकर परिवार को तानों और उपेक्षा का सामना करना पड़ा, लेकिन युवक ने विपरीत परिस्थितियों में भी पढ़ाई जारी रखी।प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने सरकारी स्कूल से प्राप्त की। उनकी प्रतिभा को देखते हुए प्रधानाध्यापिका ने निजी विद्यालय में प्रवेश दिलाया। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने हाईस्कूल में 84.5 प्रतिशत तथा इंटरमीडिएट (पीसीएम) में 87.2 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। आर्थिक तंगी के कारण छोटे भाई को पढ़ाई छोड़नी पड़ी, लेकिन उन्होंने अपनी शिक्षा जारी रखी।उच्च शिक्षा के लिए शहर जाकर बीएससी (भौतिकी, रसायन, गणित) में प्रवेश लिया। पढ़ाई के साथ ट्यूशन पढ़ाकर तथा स्कूल में कार्य कर उन्होंने अपनी फीस और परिवार का खर्च उठाया। बीटीसी में चयन के दौरान निजी संस्थान द्वारा निर्धारित शुल्क से अधिक 70 हजार रुपये फीस वसूली गई, जिसके लिए उनकी मां को अपने गहने और भैंस तक बेचनी पड़ी। वर्ष 2019 में उन्होंने बीटीसी 90 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण किया।कोरोना काल में ट्यूशन बंद होने से आर्थिक संकट आया, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और एमएससी केमिस्ट्री में प्रवेश लिया। वर्ष 2021 में उन्होंने एमएससी 64 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण किया। अपनी कमाई और कर्ज के सहारे उन्होंने झोपड़ी की जगह पक्का मकान भी बनवाया। वर्ष 2024 में उन्होंने बीएड परीक्षा भी उत्तीर्ण की।वर्ष 2024-25 में युवक ने लखनऊ विश्वविद्यालय में रसायन विज्ञान विषय से पीएचडी में प्रवेश लिया। उनके शोध निर्देशक डॉ. नीरज कुमार मिश्र तथा सह-निर्देशक डॉ. अजीत शंकर सिंह (डीएमएसआरडीई, कानपुर, डीआरडीओ) हैं। उनका शोध सी–एच फंक्शनलाइजेशन आधारित पॉलिमर कोटिंग्स पर केंद्रित है, जिससे रक्षा उपकरणों के लिए हल्की, मजबूत और टिकाऊ कोटिंग्स विकसित की जा सकेंगी। यह शोध मिसाइल, नौसेना और एयरोस्पेस प्लेटफॉर्म को उच्च तापमान और कठोर वातावरण से बेहतर सुरक्षा प्रदान करेगा।यह युवक अपने परिवार का पहला तथा महराजगंज ब्लॉक में रसायन विज्ञान विषय से पीएचडी करने वाला एकमात्र शोधार्थी बन गया है। उनकी सफलता संघर्ष और दृढ़ संकल्प की मिसाल बनकर उभरी है।

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