

गौरव श्रीवास्तव/अमन गुप्ता,आजमगढ़। मदरसा जामिया नुरूल उलूम मुबारकपुर की मान्यता निलंबित किए जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने रजिस्ट्रार मदरसा शिक्षा परिषद के निलंबन आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। अदालत ने विपक्षी पक्ष को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।मामला कथित फर्जी दानपत्र के आधार पर मदरसे की मान्यता हासिल किए जाने की शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता हाजी इमाम अली ने मदरसा शिक्षा परिषद, लखनऊ में शिकायत कर आरोप लगाया था कि मदरसा जामिया नुरूल उलूम की मान्यता कथित फर्जी दानपत्र के आधार पर ली गई है।शिकायत पर मदरसे के प्रबंधक जहीन अहमद की ओर से प्रस्तुत जवाब को संतोषजनक नहीं मानते हुए रजिस्ट्रार मदरसा परिषद ने 20 अगस्त 2026 को मदरसे की मान्यता निलंबित कर दी थी। इसके बाद प्रबंध समिति के तत्कालीन और वर्तमान सदस्यों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने का आदेश भी दिया गया।निलंबन आदेश के खिलाफ मदरसे के प्रबंधक जहीन अहमद ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में रिट याचिका दाखिल की। याचिका में दलील दी गई कि मान्यता निलंबित करने की कार्रवाई केवल निर्धारित परिस्थितियों में ही की जा सकती है। अधिवक्ता की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि वर्ष 2010 में मदरसे को अनुदान पर लेने की प्रक्रिया के दौरान तत्कालीन जिलाधिकारी ने स्थलीय निरीक्षण के बाद अनुदान की संस्तुति की थी।याचिका में यह तर्क भी रखा गया कि इस मामले में बिना किसी नए स्थलीय निरीक्षण के मान्यता निलंबित कर दी गई। वहीं, दानपत्र की वैधता को लेकर अदालत ने कहा कि इस पहलू पर आगे विचार किया जाएगा कि दानपत्र वैध है अथवा अवैध।मामले की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार ने 20 अगस्त 2026 के निलंबन आदेश के प्रभाव और उसके क्रियान्वयन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी। मामले में अगली कार्रवाई विपक्षी पक्ष के जवाब दाखिल करने के बाद होगी।
