

‘कन्हैया लाल अस्थाना ‘प्रहरी’ के गीत-संग्रह ‘गुनगुने गीत’ का हुआ लोकार्पण
गौरव श्रीवास्तव/अमन गुप्ता,आजमगढ़। प्रतिभा निकेतन इंटर कॉलेज, अतलस पोखरा का प्रांगण रविवार को साहित्य, स्मृति और संवेदनाओं के अनूठे संगम का साक्षी बना। शैदा साहित्य मंडल, आजमगढ़ के तत्वावधान में आयोजित शैदा जयंती एवं साहित्यिक समारोह में सुप्रसिद्ध रचनाकार विश्वनाथ लाल शैदा की जयंती साहित्यिक गरिमा के साथ मनाई गई।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कन्हैया लाल अस्थाना प्रहरी रहे। समारोह में मंडल के प्रथम अध्यक्ष रहे स्वर्गीय सूरज सहाय लाल ‘ध्रुव’ को मरणोपरांत शैदा साहित्य सम्मान से अलंकृत कर उनकी साहित्यिक एवं मानवीय विरासत को श्रद्धापूर्वक याद किया गया।समारोह के प्रथम चरण में विश्वनाथ लाल शैदा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से चर्चा हुई। संजय श्रीवास्तव एवं अजय गुप्ता ने उनके जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों को साझा करते हुए उनकी साहित्य-साधना, संवेदनशीलता और रचनात्मक योगदान को रेखांकित किया। वक्ताओं ने कहा कि शैदा की लेखनी ने शब्दों को जीवन की अनुभूतियों से जोड़ने का काम किया।दूसरे चरण में शैदा साहित्य मंडल के 1984 के संस्थापक अध्यक्ष रहे स्वर्गीय सूरत सहाय लाल ‘ध्रुव’ को मरणोपरांत शैदा साहित्य सम्मान प्रदान किया गया। सम्मान उनके सबसे छोटे पुत्र डॉक्टर भक्तवत्सल सहाय ने परिजनों संग ग्रहण किया। सम्मान ग्रहण करने के बाद डॉक्टर भक्तवत्सल ने अपने पिता को याद करते हुए भावुक संस्मरण सुनाए। उन्होंने पिता को केवल साहित्यकार के रूप में नहीं, बल्कि परिवार की धुरी और जीवन के आत्मीय सहचर के रूप में स्मरण किया। उन्होंने ‘उठ जाग मुसाफिर भोर भयो, अब रैन कहा जो सोवत है’ पंक्तियों के माध्यम से पिता की स्मृतियों को स्वर दिया।डॉक्टर भक्तवत्सल ने पारिवारिक जीवन से जुड़े आत्मीय क्षणों को भी साझा किया। इन संस्मरणों ने समारोह के माहौल को भावुक कर दिया। उपस्थित लोगों को लगा मानो स्मृतियों के पन्नों से ‘ध्रुव’ जी का स्नेहिल व्यक्तित्व फिर सामने आ गया हो। तीसरे चरण में खुद को ध्रुव’ जी का मानस पुत्र मानने वाले रचनाकार कन्हैया लाल अस्थाना ‘प्रहरी’ के ध्रुव’ जी को समर्पित गीत-संग्रह ‘गुनगुने गीत’ का लोकार्पण किया गया। संग्रह के गीतों में सहजता, संवेदना और जीवन से जुड़े अनुभवों की झलक देखने को मिली। समारोह के अंतिम चरण में सरस कवि सम्मेलन हुआ। इस अवसर पर प्रोफेसर अखिलेश सिंह, प्रोफेसर गीता सिंह, डीएवी के प्रवक्ता जगदम्बा दुबे, घायल, सागर, हरिहर पाठक, अमित श्रीवास्तव, कौशल कुमार राय, देव और रूद्रनाथ चौबे समेत अनेक रचनाकारों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भाव-विभोर किया। समारोह में साहित्य, स्मृति और संवेदना के विभिन्न रंग एक साथ दिखाई दिए। शैदा की साहित्यिक स्मृति, ‘ध्रुव’ जी के जीवन से जुड़े संस्मरण, पुस्तक का लोकार्पण और कवियों की काव्यधारा ने इस आयोजन को आत्मीय बना दिया। कार्यक्रम ने आजमगढ़ की साहित्यिक परंपरा को स्मरण करने के साथ नई पीढ़ी को साहित्य और संवेदनाओं से जुड़ने का संदेश भी दिया। इस अवसर पर रमाकांत वर्मा, डॉ प्रमोद गुप्ता, डॉ सीजी मौर्य, डॉ देवेश दुबे,डॉ डीपी तिवारी, डॉ प्रभात यादव, अनिल राय, देवव्रत श्रीवास्तव, सचिन श्रीवास्तव, रत्न प्रकाश त्रिपाठी, अर्चना वत्सल, डॉ अनिमेश वत्सल, डॉ अनुतोष वत्सल आदि उपस्थित रहे।कार्यक्रम का सफल संचालन राजेश अस्थाना अनंत ने किया।
