आज़मगढ़ में मंडराया बाढ़ का ख़तरा: घाघरा नदी लाल निशान के पार।

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​आज़मगढ़। जनपद में मानसून के सक्रिय होते ही घाघरा (सरयू) नदी का जलस्तर तेज़ी से बढ़ने लगा है। सगड़ी तहसील क्षेत्र में घाघरा नदी का पानी ख़तरे के बिंदु को पार कर चुका है। सगड़ी तहसील के 134 गाँवों पर नज़र, प्रशासनिक तैयारियाँ पूरी करने का दवा । बदरहुआ नाला पर स्थापित मुख्य मापक स्थल पर नदी का जलस्तर 71.74 मीटर दर्ज किया गया है, जो ख़तरे के निशान 71.68 मीटर से 0.06 मीटर ऊपर पहुँच गया है। यद्यपि वर्तमान में किसी गाँव या मुख्य मार्ग में सीधा जलभराव नहीं हुआ है, लेकिन नदी के लगातार चढ़ाव को देखते हुए तटीय इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 में घाघरा का जलस्तर 73.52 मीटर तक पहुँचा था। प्रशासन ने अगस्त, सितम्बर और अक्टूबर को सम्भावित बाढ़ काल मानते हुए सभी सम्बंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रख दिया है। ​बाढ़ के सम्भावित ख़तरे के मद्देनज़र सगड़ी तहसील के कुल 134 गाँवों को चिन्हित किया गया है, जिनमें 78 आबाद और 56 गैर-आबाद गाँव शामिल हैं। इन गाँवों की कुल 1,37,494 आबादी और 34,049 पशुधन बाढ़ के प्रभाव क्षेत्र में आ सकते हैं। स्थिति से निपटने के लिए जिले के 66 किलोमीटर से अधिक लंबे 7 तटबंधों पर 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है। महुला गढ़वल तटबंध, अराजी गंगापुर और देवारा ख़ास राजा को अतिसंवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। तटबंधों की सुरक्षा और निगरानी के लिए 17 बाढ़ सुरक्षा समितियों का गठन किया गया है और क्षेत्र में स्थित 55 रेगुलेटरों को पूर्णतः क्रियाशील रखा गया है। ​बाढ़ से बचाव के लिए शासन स्तर से स्वीकृत कटाव निरोधक एवं सुरक्षात्मक परियोजनाओं का भौतिक सत्यापन कर उन्हें शत-प्रतिशत पूर्ण कर लिया गया है। इनमें परसिया व सहबदिया सुल्तानपुर सुरक्षा कार्य, महुला गढ़वल तटबंध की स्लोप पिचिंग का पुनर्स्थापना कार्य, अराजी गंगापुर, मल्हापुर व पुरैनिया कटाव निरोधक कार्य तथा देवारा ख़ास राजा, झागरहवा व बगहवा सुरक्षा कार्य शामिल हैं। ​आपदा प्रबंधन एवं राहत कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर निविदा प्रक्रियाएँ पूरी कर ली गई हैं। राहत सामग्री वितरण हेतु राशन किट, लंच पैकेट, सफाई मजदूरों और शरणालयों में लॉजिस्टिक्स व्यवस्था के लिए फर्मों का चयन कर दरें निर्धारित की जा चुकी हैं। स्थानीय स्तर पर 319 नौकाएँ उपलब्ध कराई गई हैं, जिनमें बड़ी, मझोली और छोटी नावें शामिल हैं। नाविकों से सीधा अनुबंध कर लिया गया है ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल जलमार्ग से राहत पहुँचाई जा सके। ​जनपद में 15 जून से ही 10 बाढ़ चौकियों को क्रियाशील कर दिया गया है। इसके अलावा विस्थापित होने वाले ग्रामीणों के ठहरने के लिए 14 राहत शरणालय चिन्हित किए गए हैं, जहाँ बिजली, पंखे, शुद्ध पेयजल, शौचालय और स्वच्छता की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। स्वास्थ्य विभाग ने प्रत्येक बाढ़ चौकी पर एक-एक मेडिकल टीम तैनात कर दी है। चौकियों पर ब्लीचिंग पाउडर, क्लोरीन की गोलियाँ, ओआरएस पैकेट, जीवनरक्षक दवाएँ और एंटी स्नेक वेनम का पर्याप्त स्टॉक जमा कर लिया गया है। पशुपालन विभाग की 10 टीमों ने 11 हजार से अधिक पशुओं का टीकाकरण संपन्न करा लिया है। ​राहत एवं बचाव कार्यों को गति देने के लिए 100 प्रशिक्षित आपदा मित्रों को अलर्ट पर रखा गया है, जिन्होंने तटीय क्षेत्रों में ग्रामीणों के साथ मॉकड्रिल भी की है। रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए ओबीएम बोट, लाइफ जैकेट, लाइफबॉय, वॉकी-टॉकी, जीपीएस सेट और फर्स्ट एड किट का रिजर्व स्टॉक तैयार है। जिलाधिकारी एवं अपर जिलाधिकारी द्वारा प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर अधिकारियों को 24 घंटे सतर्क रहने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन, कलेक्ट्रेट कंट्रोल रूम, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और सेना के अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क बनाए हुए है।

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