सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी पर शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब, भंवरनाथ में मेले जैसा माहौल

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गौरव श्रीवास्तव/अमन गुप्ता,आजमगढ़। सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के पावन संयोग पर सोमवार को आजमगढ़ जिले में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह होते ही जिले के प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की, वहीं नाग पंचमी के अवसर पर नाग देवता की भी पूजा की गई और परंपरा के अनुसार दूध चढ़ाया गया। मंदिरों में हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय नजर आया।आजमगढ़ शहर के समीप स्थित प्रसिद्ध भंवरनाथ मंदिर में सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी को लेकर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पहुंचने लगी। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई। बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से पूरा इलाका मेले जैसा नजर आया।दूर-दराज से आए श्रद्धालु पैदल ही मंदिर की ओर जाते दिखाई दिए। कई भक्त हाथों में गंगाजल, दूध, बेलपत्र और पूजा सामग्री लेकर भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए कतार में लगे रहे। मंदिर परिसर में लगातार हर-हर महादेव के जयकारे गूंजते रहे।भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। करतारपुर तिराहे से आगे बैरिकेडिंग कर वाहनों का प्रवेश नियंत्रित कर दिया गया था। चार पहिया वाहनों को करतारपुर के पास ही रोक दिया जा रहा था, जबकि दो पहिया वाहनों को भी मंदिर से कुछ दूरी पर रोककर श्रद्धालुओं को पैदल भेजा जा रहा था।वाहन प्रतिबंधित किए जाने के कारण श्रद्धालुओं को काफी दूरी पैदल तय करनी पड़ी। इसके बावजूद लोगों में भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक को लेकर खासा उत्साह दिखाई दिया।मंदिर परिसर से लेकर बाहर तक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। मुख्य गेट, बैरिकेडिंग प्वाइंट और मंदिर परिसर के अंदर पुलिसकर्मी लगातार व्यवस्था संभालते नजर आए। श्रद्धालुओं को अलग-अलग कतारों में लगाकर दर्शन और जलाभिषेक के लिए भेजा गया।भीड़ अधिक होने के बावजूद व्यवस्था बनाए रखने के लिए श्रद्धालुओं को एक स्थान पर ज्यादा देर रुकने नहीं दिया जा रहा था। जलाभिषेक और दर्शन के बाद भक्तों से जल्द बाहर निकलने की अपील की जा रही थी, ताकि पीछे से आने वाले श्रद्धालुओं को भी आसानी से मंदिर में प्रवेश मिल सके।सोमवार को नाग पंचमी होने के कारण भगवान शिव की पूजा के साथ नाग देवता की पूजा का भी विशेष महत्व रहा। श्रद्धालुओं ने परंपरा के अनुसार नाग देवता को दूध चढ़ाकर पूजा-अर्चना की। मंदिरों के आसपास नाग पंचमी को लेकर विशेष धार्मिक माहौल देखने को मिला।भंवरनाथ मंदिर के बाहर सपेरे भी दिखाई दिए। सपेरे लोगों को नाग देवता के दर्शन करा रहे थे और इसके बदले परंपरा के अनुसार श्रद्धालुओं से दान-दक्षिणा भी ले रहे थे। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग सपेरों के आसपास भी नजर आए।श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिसकर्मी लगातार मुस्तैद रहे। मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार से लेकर बाहर की बैरिकेडिंग और यातायात व्यवस्था तक पुलिस की तैनाती रही। भीड़ को नियंत्रित करने के साथ-साथ वाहनों की आवाजाही को भी व्यवस्थित तरीके से नियंत्रित किया गया।पुलिस की कोशिश रही कि श्रद्धालुओं को दर्शन के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो और भीड़ एक जगह इकट्ठा न होने पाए। बैरिकेडिंग के जरिए लोगों की आवाजाही को नियंत्रित कर अलग-अलग रास्तों से मंदिर तक पहुंचाया गया।भारी भीड़ और वाहनों को दूर रोक दिए जाने के कारण श्रद्धालुओं को काफी दूरी पैदल चलना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और युवा सभी भगवान शिव के दर्शन के लिए कतार में नजर आए।सुबह से दोपहर तक भंवरनाथ मंदिर और आसपास का पूरा क्षेत्र शिवभक्ति में डूबा रहा। सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के एक साथ पड़ने से इस बार मंदिरों में श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ देखने को मिली।

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