

गौरव श्रीवास्तव/अमन गुप्ता,आजमगढ़। सिविल कोर्ट बार एसोसिएशन, आजमगढ़ के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक कुमार पाण्डेय ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, पेपर लीक की घटनाओं पर रोक लगाने तथा छात्रों को न्याय दिलाने की मांग को लेकर महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन प्रेषित किया है।ज्ञापन में कहा गया है कि देशभर के लाखों छात्र-छात्राएं वर्षों की मेहनत और आर्थिक कठिनाइयों के बीच विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन लगातार सामने आ रही पेपर लीक की घटनाओं, परीक्षा संबंधी अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही से छात्रों का परीक्षा प्रणाली पर विश्वास कमजोर हुआ है। इससे अनेक छात्र मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं और कुछ मामलों में दुखद घटनाएं भी सामने आई हैं।अशोक कुमार पाण्डेय ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि केंद्र सरकार को परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार के लिए आवश्यक निर्देश दिए जाएं। उन्होंने मांग की कि पेपर लीक की घटनाओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित विभागों की जवाबदेही तय करते हुए दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही आंदोलनरत छात्रों के प्रतिनिधियों से संवाद स्थापित कर उनकी जायज मांगों का समाधान किया जाए तथा पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं से प्रभावित छात्रों को न्याय दिलाया जाए। आंदोलनकारी छात्रों पर दर्ज मामलों की निष्पक्ष समीक्षा कर उचित निर्णय लेने की भी मांग की गई है।ज्ञापन में परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए गए हैं। इनमें पेपर मूल्यांकन में बिना पर्याप्त मानवीय निगरानी के एआई के उपयोग से बचने, परीक्षा केंद्रों का चयन पूरी तरह कंप्यूटर आधारित रैंडम प्रणाली से करने, अधिक अभ्यर्थियों वाली परीक्षाओं को आवश्यकता अनुसार एक से अधिक चरणों में आयोजित करने तथा प्रश्नपत्रों को सुरक्षित डिजिटल एन्क्रिप्शन के माध्यम से परीक्षा केंद्रों तक भेजने की व्यवस्था लागू करने की मांग शामिल है। इसके अलावा परीक्षा के दिन निर्धारित समय पर ही परीक्षा केंद्रों पर प्रश्नपत्र डाउनलोड एवं प्रिंट करने की सुरक्षित प्रणाली विकसित करने का सुझाव भी दिया गया है।उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष समीक्षा कराने, परीक्षा प्रक्रिया का थर्ड पार्टी ऑडिट कराने तथा भविष्य में पेपर लीक की संभावनाओं को न्यूनतम करने के लिए प्रभावी और जवाबदेह व्यवस्था विकसित करने की मांग भी उठाई है।
