


गौरव श्रीवास्तव/अमन गुप्ता,आजमगढ़। जिले में समाजवादी पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सपा नेता इंजीनियर सुनील कुमार यादव ने सोशल मीडिया पर अपनी आवाज़ दबाए जाने का आरोप लगाते हुए इसे लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गंभीर हमला बताया। उन्होंने कहा कि हाल ही में उनका सोशल मीडिया पेज बिना किसी स्पष्ट कारण और बिना सुनवाई के सस्पेंड कर दिया गया और फिर 24 घंटे के भीतर डिएक्टिवेट कर दिया गया। यादव के अनुसार, पिछले एक साल में उनके पेज से करीब एक लाख से अधिक लोग जुड़े थे, जहां वे लगातार राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी बात रखते रहे हैं। प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका बेहद अहम होती है और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना उसका अधिकार ही नहीं, बल्कि कर्तव्य भी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर किसी नीति से समाज का कोई वर्ग प्रभावित होता है, तो उस पर आवाज़ उठाना लोकतंत्र को मजबूत करता है। यादव ने दावा किया कि उनके किसी भी पोस्ट में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की गाइडलाइन का उल्लंघन नहीं किया गया था। उन्होंने बताया कि उन्होंने केवल नीतिगत मुद्दों, मीडिया की भूमिका और कुछ घटनाओं पर सवाल उठाए थे, साथ ही हिंसा के खिलाफ भी अपील की थी। उन्होंने आशंका जताई कि संगठित तरीके से उनकी पोस्ट पर रिपोर्ट कराकर उनका अकाउंट बंद कराया गया। हालांकि, उन्होंने किसी विशेष संस्था या व्यक्ति का नाम लेने से परहेज किया, लेकिन इशारों में इसे एक “आईटी सेल” की रणनीति बताया। मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया को निष्पक्ष रहकर सत्ता और विपक्ष दोनों की आवाज़ को समान रूप से जनता तक पहुंचाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि मीडिया एकतरफा हो जाएगी, तो लोकतंत्र कमजोर हो जाएगा। एक सवाल के जवाब में उन्होंने ओम प्रकाश राजभर पर भी तीखा पलटवार करते हुए कहा कि जो व्यक्ति अपने समाज का सम्मान नहीं कर सकता, उसके बारे में बात करना समय की बर्बादी है। इस मौके पर सपा के जिला अध्यक्ष हवलदार यादव और दलित नेता अजीत राव भी मौजूद रहे। इस पूरे घटनाक्रम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की निष्पक्षता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब यह देखना होगा कि यह कार्रवाई नियमों के तहत हुई या इसके पीछे कोई अन्य कारण है।
