वन स्टॉप सेन्टर पर बच्चों एवं महिलाओं के कानूनी अधिकारों के बारे में विधिक जागरूकता कार्यक्रम का किया गया आयोजन

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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में महिलाओं को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था-सचिव

गौरव श्रीवास्तव/अमन गुप्ता,आजमगढ़ । मा० उ०प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार एवं मा० जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में जनपद में स्थित वन स्टॉप सेन्टर पर बच्चों एवं महिलाओं के कानूनी अधिकारों के बारे में विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण आजमगढ़ नितिका राजन द्वारा बताया गया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद-24 में यह उल्लिखित है कि कारखानों, दुकानों, सार्वजनिक स्थलों पर 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से कार्य कराना दण्डनीय अपराध है। शिविर में बताया गया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 भारत में एक महत्वपूर्ण कानून है, जो 6 से 14 वर्ष के बच्चों को मुक्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्रदान करता है इस अधिनियम का उद्देश्य देश के सभी बच्चों को समान शिक्षा के अवसर प्रदान करना है। इस अधिनियम के अन्तर्गत माता पिता या अभिभावक छह से चौदह वर्ष की आयु के बच्चों को शिक्षा का अवसर प्रदान करेंगे तथा राज्य द्वारा बच्चों को मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान की जायेगी। सचिव ने शिविर में उपस्थित महिलाओं को पी०सी०पी०एन०डी०टी० एक्ट, घरेलू हिंसा अधिनियम के बारे में जागरूक किया तथा बताया कि वन स्टॉप सेन्टर पर एक ही छत के नीचे पुलिस सहायता, कानूनी सहायता एवं परामर्श मानसिक स्वास्थ्य समर्थन और अस्थायी आश्रय प्रदान किया जाता है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में महिलाओं को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था है, यदि महिलाओं को किसी प्रकार की कोई कानूनी समस्या है तो वह लिखित रूप से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यालय में प्रार्थना पत्र दे सकती है और उन्हें समुचित न्याय दिलाने का प्रयास किया जायेगा। इस मौके पर वन स्टॉप सेन्टर की प्रबन्धक, केस वर्कर लीगल एड डिफेन्स काउन्सिल के समस्त सदस्य, पराविधिक स्वयं सेवक, महिला पुलिसकर्मी उपस्थित रहे।

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