


गौरव श्रीवास्तव/अमन गुप्ता,आजमगढ़ के कप्तानगंज थाना क्षेत्र के चेवता गांव में शनिवार को उस समय खुशी का माहौल देखने को मिला, जब यूपीएससी सिविल सर्विसेज परीक्षा में 345वीं रैंक हासिल करने वाले रुद्र प्रताप सिंह अपने गांव पहुंचे। गांव पहुंचते ही ग्रामीणों ने उनका भव्य स्वागत किया। लोगों ने उन्हें माला पहनाकर और मिठाई खिलाकर सम्मानित किया। जैसे ही गांव के लोगों को रुद्र प्रताप की इस बड़ी सफलता की जानकारी मिली, पूरे गांव में हर्षोल्लास का माहौल बन गया।रुद्र प्रताप सिंह के पिता अशोक सिंह आर्मी से रिटायर हैं और वर्तमान में दीवानी न्यायालय में वकालत करते हैं, जबकि उनकी मां नीलम सिंह गृहिणी हैं। माता-पिता ने बेटे की पढ़ाई में कोई कमी नहीं होने दी। रुद्र प्रताप ने प्राथमिक शिक्षा गांव से ही प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने पिता की पोस्टिंग के अनुसार अलग-अलग स्थानों पर पढ़ाई की। 10वीं और 12वीं की पढ़ाई आजमगढ़ शहर के चिल्ड्रन कॉलेज (यूपी बोर्ड) से पूरी की।रुद्र प्रताप की पत्नी रेशु सिंह पल्हनी के डुगडुगवां प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक हैं। उन्होंने भी ढाई साल के बच्चे के साथ रहते हुए पति की तैयारी में पूरा सहयोग दिया।शनिवार को गांव पहुंचने पर ढोल-ताशों के साथ उनका स्वागत किया गया। ग्रामीण जुलूस की शक्ल में उन्हें घर से करीब 500 मीटर दूर डीह बाबा मंदिर तक लेकर गए, जहां उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भगवान का आशीर्वाद लिया।बताया जाता है कि रुद्र प्रताप सिंह वर्तमान में मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में इंटेलिजेंस ब्यूरो में एसीआईओ-1 के पद पर तैनात हैं। वह वर्ष 2018 से आईबी में कार्यरत हैं और पहली पोस्टिंग नागालैंड में रही। इसके बाद उनकी तैनाती टीकमगढ़ और फिर छिंदवाड़ा में हुई।उन्होंने वर्ष 2016 में जेके इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड फिजिक्स, प्रयागराज यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया। इसके बाद आईबी की नौकरी के साथ ही 2020 से सिविल सर्विसेज की ऑनलाइन तैयारी शुरू की। चौथे प्रयास में उन्हें यह सफलता मिली। इससे पहले 2023 में वह इंटरव्यू तक पहुंचे थे।रुद्र प्रताप ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार और गांव के लोगों के आशीर्वाद को दिया। उन्होंने प्रतियोगी छात्रों को सलाह दी कि सिविल सर्विसेज की तैयारी के साथ-साथ एक वैकल्पिक करियर भी जरूर रखें, ताकि असफलता की स्थिति में निराशा से बचा जा सके।
