
गौरव श्रीवास्तव/अमन गुप्ता,आजमगढ़। श्री देवानन्द संस्कृत उच्च माध्यमिक विद्यालय, दान शनिचरा रामगढ़ में प्रधानाचार्य और शिक्षकों के कथित अनियमित अनुमोदन के मामले में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। मंडलायुक्त के निर्देश पर संयुक्त शिक्षा निदेशक ने प्रभारी जिला विद्यालय निरीक्षक वीरेंद्र प्रताप सिंह के खिलाफ नगर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए तहरीर दी है। संयुक्त शिक्षा निदेशक नवल किशोर ने बताया कि विद्यालय में रिंकी यादव को प्रधानाचार्या तथा प्रियंका और अल्का त्रिपाठी को साहित्य विषय की शिक्षिका के रूप में 9 फरवरी 2026 को अनुमोदन दिया गया था। जांच में यह प्रक्रिया नियमों के विपरीत पाई गई। अनुमोदन पत्र पर कार्यालय सहायक के हस्ताक्षर भी नहीं थे और उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद अधिनियम-2000 तथा विनियमावली-2009 का पालन नहीं किया गया।बताया गया कि इस संबंध में प्रभारी डीआईओएस से फोन पर वार्ता कर अनुमोदन निरस्त करने को कहा गया था, लेकिन इसके बावजूद अनुमोदन पत्र जारी होने का मामला सामने आया। बाद में इसे निरस्त करने का प्रयास किया गया।मामले में प्रभारी डीआईओएस से स्पष्टीकरण मांगा गया, जिसमें उन्होंने संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय में तैनात प्रधान सहायक विधिचन्द यादव पर कूटरचित पत्रावली प्रस्तुत कर गुमराह करने का आरोप लगाया। वहीं, प्रधान सहायक विधिचन्द यादव ने अपने लिखित स्पष्टीकरण में किसी भी भूमिका से इनकार किया है।जांच में यह भी सामने आया कि विद्यालय को वर्ष 2015 में अनुदान सूची में शामिल किया गया था, लेकिन वर्ष 2016 में अनुदान रोक दिया गया। अनुदान बहाली का मामला अभी शासन स्तर पर लंबित है। इसके बावजूद प्रभारी डीआईओएस द्वारा विद्यालय प्रबंधक के पत्र के आधार पर अनुमोदन किया जाना उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर माना गया है।संयुक्त शिक्षा निदेशक ने कहा कि शासन से अनुदान बहाली और शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) की स्वीकृति के बिना अनुमोदन देना गंभीर अनियमितता है। इससे विभाग और शासन के समक्ष जटिल स्थिति उत्पन्न हो सकती है और न्यायालय से वेतन भुगतान के आदेश लिए जाने की आशंका भी बन सकती है। इसे उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली-1956 के नियम-3 का उल्लंघन माना गया है।इस पूरे प्रकरण को गंभीर मानते हुए नगर कोतवाली में संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच कराने के लिए तहरीर दी गई है।
