आजमगढ़10 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद गूंजी किलकारी, द स्टर्लिंग हॉस्पिटल की डॉक्टर सोनल पाटिल के सफल उपचार से कंचन भारती बनीं मां

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गौरव श्रीवास्तव/अमन गुप्ता,आजमगढ़ शहर से सटे सराय मंदराज करतालपुर बायपास पर स्थित द स्टर्लिंग हॉस्पिटल की स्त्री, प्रसूति एवं निःसंतान रोग विशेषज्ञ डॉ. सोनल पाटिल के कुशल और सफल उपचार से एक परिवार की वर्षों पुरानी मुराद पूरी हो गई। शादी के लगभग 10 साल बाद जिले के जहानागंज क्षेत्र की निवासिनी 29 वर्षीय कंचन भारती पत्नी श्रवण कुमार को 5 फरवरी 2026 को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई।5 फरवरी को कंचन की सिजेरियन डिलीवरी कराई गई, जिसमें 2 किलो 700 ग्राम वज़न के स्वस्थ पुत्र का जन्म हुआ। बच्चे के जन्म लेते ही परिवार में खुशियों की लहर दौड़ गई और वर्षों से सूनी पड़ी कंचन की गोद भर गई।कंचन के पति श्रवण कुमार वर्तमान में सऊदी अरब में कारपेंटर का कार्य करते हैं। वर्ष 2016 में कंचन और श्रवण का विवाह हुआ था। विवाह के बाद से ही दंपती संतान सुख की कामना कर रहे थे। इस दौरान कंचन ने आजमगढ़ और जौनपुर जिले समेत कई अन्य स्थानों पर इलाज कराया, लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी।लगातार असफल प्रयासों के बाद किसी शुभचिंतक ने कंचन को द स्टर्लिंग हॉस्पिटल की डॉक्टर सोनल पाटिल के बारे में जानकारी दी। इसके बाद फरवरी 2025 में कंचन इलाज के लिए डॉक्टर सोनल पाटिल के पास पहुंचीं। आवश्यक जांच के उपरांत डॉक्टर ने उनका उपचार प्रारंभ किया, जिसके कुछ ही महीनों बाद कंचन गर्भवती हो गईं।गर्भधारण के आठ माह बाद कंचन का अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ने लगा, जिसे देखते हुए स्थिति को गंभीर मानते हुए डॉक्टर सोनल पाटिल ने तत्काल सिजेरियन डिलीवरी का निर्णय लिया। समय पर लिए गए इस निर्णय से जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह सुरक्षित रहे।डिलीवरी के बाद कंचन और नवजात शिशु को अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया। दोनों की स्थिति सामान्य रहने पर 9 फरवरी 2026 को डॉक्टर सोनल पाटिल द्वारा कंचन को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।*बाइट : डॉ सोनल पाटिल, स्त्री प्रसूति एवं निःसंतान रोग विशेषज्ञ*10 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद पुत्र की प्राप्ति होने पर कंचन और उनके परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं है। परिजनों ने डॉक्टर सोनल पाटिल और स्टर्लिंग हॉस्पिटल की पूरी टीम का आभार व्यक्त करते हुए इसे अपने जीवन का सबसे सुखद पल बताया।यह सफलता न सिर्फ एक परिवार के लिए खुशियों का कारण बनी, बल्कि निःसंतान दंपतियों के लिए भी उम्मीद की एक नई किरण साबित हुई है।

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