

गौरव श्रीवास्तव,आजमगढ़ जिले में सरकारी निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।जिलाधिकारी कार्यालय से महज 500 मीटर की दूरी पर और परिवहन विभाग के रीजनल मैनेजर के नाक के नीचे रोडवेज परिसर में गेस्ट हाउस का निर्माण किया जा रहा है।आरोप है कि यह निर्माण बिना कॉलम और पिलर के, पुरानी नींव पर बीम डालकर और पुरानी ईंटों के इस्तेमाल से कराया जा रहा है, जबकि इस परियोजना पर करीब 17 लाख रुपये की लागत बताई जा रही है। मामला आजमगढ़ जिले के रोडवेज परिसर का है, जहां पुराने डाक बंगले को ध्वस्त कर नई गेस्ट हाउस बिल्डिंग का निर्माण कराया जा रहा है।हैरानी की बात यह है कि निर्माण में न तो आरसीसी कॉलम बनाए जा रहे हैं और न ही पिलर खड़े किए गए हैं।पुरानी नींव के ऊपर ही बीम ढालकर सीधे दीवार खड़ी की जा रही है, और दीवारों में पुरानी ईंटों का इस्तेमाल किया जा रहा है। जब इस पूरे मामले में रोडवेज के रीजनल मैनेजर मनोज कुमार बाजपेई से सवाल किया गया तो उन्होंने साफ कहा कि—“मुझे इस निर्माण से कोई मतलब नहीं है, मैं इस पर कोई जवाब नहीं दे सकता। मुझे ऊपर से मना किया गया है, यह डीएम और एसपी का काम है।”वहीं मौके पर काम कर रहे मजदूरों का कहना है कि—“ठेकेदार और जेई ने जैसा काम करने को कहा है, हम वैसा ही काम कर रहे हैं। हमें तकनीकी जानकारी नहीं है।बाइट -मजदूरइस निर्माण को लेकर स्थानीय व्यक्ति नीरज सिंह ने कड़ा विरोध जताया है।उन्होंने कहा कि रोडवेज परिसर में 17 लाख रुपये की लागत से गेस्ट हाउस बनाया जा रहा है, लेकिन बिना पिलर और पुराने ईंटों से निर्माण कराया जा रहा है।उनका आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया पुरानी मानसिकता के तहत की जा रही है, जिसमें सरकारी पैसों का खुला दुरुपयोग हो रहा है। सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इससे अनजान हैं? बिना कॉलम-पिलर और पुरानी सामग्री से हो रहे इस निर्माण की गुणवत्ता की जांच कब होगी?और क्या 17 लाख रुपये की लागत का सही उपयोग हो रहा है — या फिर सरकारी धन की बंदरबांट की जा रही है?
