

गौरव श्रीवास्तव/अमन गुप्ता,आजमगढ़। जिले के रानी की सराय थाना क्षेत्र के रुद्री गांव में 19 साल पहले दशहरे के दिन हुए चर्चित दोहरे हत्याकांड में सोमवार को अदालत ने अहम फैसला सुनाया। 21 अक्टूबर 2007 को दिनदहाड़े पारसनाथ सिंह और तालुकदार सिंह की गोली मारकर हत्या करने तथा अन्य लोगों को घायल करने के मामले में रानी की सराय ब्लॉक प्रमुख विपिन सिंह समेत 8 आरोपियों को दोषी करार दिया गया है। अदालत अब 29 अक्टूबर को दोषियों की सजा पर फैसला सुनाएगी। लंबे समय से चल रहे इस मुकदमे में फैसला आने के बाद कोर्ट परिसर में भारी गहमागहमी देखने को मिली। दोनों पक्षों के लोगों के साथ ही बड़ी संख्या में अन्य लोग भी अदालत परिसर में जुटे रहे। विपिन पक्ष की तरफ से राजेश सिंह, बलवंत सिंह, रणजीत सिंह, पंकज सिंह, राधेश्याम सिंह, लोकनाथ सिंह, जीवनप्रकाश सिंह, शिवदास सिंह आरोपी थे। एक आरोपी की मृत्यु हो चुकी है।अदालत से दोषी करार दिए जाने के बाद दोनों पक्षों के दोषसिद्ध लोगों को हिरासत में लेने के लिए पुलिस सक्रिय हो गई। शहर कोतवाल यादवेंद्र पांडेय के नेतृत्व में पहुंची पुलिस फोर्स ने दोषियों को हिरासत में लिया। इसके बाद सभी को पुलिस वैन से इटौरा स्थित मंडलीय कारागार ले जाया गया। अदालत के फैसले को लेकर परिसर में पूरे दिन लोगों के बीच चर्चा होती रही। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस की मौजूदगी के बीच दोषियों को वहां से रवाना किया गया।वादी पक्ष के अधिवक्ता विंध्यवासिनी सिंह के अनुसार, यह मामला गांव में वर्चस्व की लड़ाई और मां-बदाई से जुड़े विवाद का परिणाम था। 21 अक्टूबर 2007 को दशहरे के दिन रुद्री गांव में दिनदहाड़े हथियारों से लैस हमलावरों ने पारसनाथ सिंह और तालुकदार सिंह को निशाना बनाया था। आरोप है कि हमलावरों ने लाइसेंसी राइफल, पिस्टल और अवैध असलहों से लैस होकर पीड़ितों को दौड़ाकर गोली मारी थी। इस घटना में दोनों की मौत हो गई थी, जबकि अन्य लोग घायल हुए थे। वारदात के बाद मामला काफी चर्चित हुआ और लंबे समय तक इसकी सुनवाई चलती रही।अधिवक्ता विंध्यवासिनी सिंह ने बताया कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 17 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। उनके मुताबिक, आरोपियों की ओर से मुकदमे की कार्यवाही को प्रभावित करने और सुनवाई में देरी कराने के प्रयास किए गए। कई बार हाईकोर्ट से स्थगन आदेश लेकर कार्यवाही टालने की कोशिश भी हुई, लेकिन वादी पक्ष ने न्याय की लड़ाई जारी रखी। वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर नौ आरोपियों को दोषी करार दिया।वादी पक्ष के अधिवक्ता के मुताबिक, मामले की गंभीरता को देखते हुए दोषियों को आजीवन कारावास से लेकर मृत्युदंड तक की सजा हो सकती है। हालांकि, सजा की वास्तविक अवधि और प्रकृति का निर्णय अदालत ही करेगी। इसके लिए 29 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की गई है। अब दोनों पक्षों के साथ-साथ क्षेत्र के लोगों की निगाहें अदालत के अगले फैसले पर टिकी हैं।इस मुकदमे में आरोपी पक्ष की ओर से भी क्रॉस केस दर्ज कराया गया था। अधिवक्ता के अनुसार, दूसरे पक्ष के पांच लोगों को भी उस मामले में दोषी करार दिया गया है। हालांकि, उस मुकदमे में अपेक्षाकृत हल्की धाराओं में आरोप दर्ज होने की बात कही गई है। ऐसे में दोनों मामलों में सजा का निर्धारण संबंधित धाराओं, साक्ष्यों और अदालत के आदेश के आधार पर होगा। करीब 19 साल पुराने इस मामले में दोषसिद्धि को महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। लंबे समय तक चली सुनवाई, गवाहों के बयान और कानूनी दांव-पेच के बाद आए फैसले ने एक बार फिर रुद्री गांव के उस दशहरे की घटना को चर्चा में ला दिया है। फिलहाल, सभी दोषियों को हिरासत में लेकर मंडलीय कारागार भेज दिया गया है और 29 अक्टूबर को होने वाले सजा के ऐलान का इंतजार किया जा रहा है।
