अहरौला कांड में नया मोड़: आरोपी की बहन का आरोप- 8 वर्षीय बच्चे की मौत पुलिस की गोली से हुई, एसएसपी ने बताया जवाबी कार्रवाई में आरोपी की गोली से हुई मौत, प्रेत बाधा दूर करने के लिए घर में कराया जा रहा था अनुष्ठान

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गौरव श्रीवास्तव/अमन गुप्ता,आजमगढ़ जिले के अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में हुई पांच मौत में से आरोपी के बेटे की मौत पर उसे वक्त सवाल खड़ा हो गया जब घटना के दूसरे दिन मीडिया से बातचीत में आरोपी की मां श्याम बली देवी और बहन साधना ने आरोप लगाते हुए कहा कि 8 वर्षीय आरोपी के बेटे शौर्य सिंह की मौत पुलिस की गोली से हुई है, आरोपी की गोली से नहीं।मृत बच्चों की दादी और बुआ ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है। वही मृत बच्चे के परिजनों के आरोप पर आजमगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ अनिल कुमार ने स्पष्ट किया कि रेस्क्यू के दौरान 6 से 7 घंटे समझाने के बाद भी आरोपी बच्चों को छोड़ने को तैयार नहीं था। पुलिस ने काफी लंबा समय इंतजार किया। इसके बाद बंद कमरे में आरोपी ने अपनी बेटे को गोली मार दी तो पुलिस दरवाजा तोड़कर अंदर घुसी उस दौरान आरोपी ताबड़तोड़ फायरिंग कर रहा था जवाबी कार्रवाई में आरोपी को गोली लगी इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई जबकि आरोपी की गोली से घायल बच्चे की भी इलाज के दौरान मौत हो गई। उन्होंने बताया कि आरोपी के घर में अनुष्ठान का आयोजन प्रेत बाधा बाधा दूर करने के लिए किया गया था। आरोपी की पत्नी और मां को लगता था कि आरोपी के ऊपर प्रेत बाधा है जिसे दूर करने के लिए अनुष्ठान कराया जा रहा था। एसपी ने बताया कि मौके पर शांति व्यवस्था कायम है। एसएससी ने बताया कि मृतकों के शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।आपको बता दे आजमगढ़ जिले के अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में मंगलवार को शाम में पूजा के दौरान हुए विवाद ने खूनी रूप ले लिया। बताया गया कि बाजार से घर पहुंचे अरविंद सिंह के घर पर पूजा हो रही पंडितों से आधार कार्ड मांगने को लेकर विवाद हो गया। आरोप है कि उसी दौरान अरविंद ने घर में रखी लाइसेंसी पिस्टल से फायरिंग कर दी, गोली लगने से उसकी पत्नी बबीता समेत दो पंडितों की मौत हो गई। मृतकों में पंडित महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा बताए जा रहे हैं। आरोपी फायरिंग के बाद अपने को बचाने के लिए बच्चों के साथ घर में खुद को बंद कर लिया, जहां वाराणसी जोन के एडीजी तथा जिले के आला अधिकारी समेत कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची और कई घंटे लगे रेस्क्यू ऑपरेशन करने में लगे रहे।जानकारी के अनुसार तीन-चार दिन से अरविंद सिंह के घर में पूजा चल रही थी। मंगलवार की शाम को घर में तीन पंडित, अरविंद की पत्नी बबीता और उनके बच्चे मौजूद थे। शाम करीब 6-7 बजे अरविंद बाजार से घर पहुंचे, जहां घर में पूजा होते देखकर उन्होंने पंडितों से जानकारी ली। इसके बाद बौखला कर पंडितों से आधार कार्ड मांगना शुरू कर दिया। इसी बात को लेकर उनके बीच बहस होने लगी। आरोप है कि विवाद के दौरान अरविंद ने लाइसेंसी पिस्टल निकालकर फायरिंग कर दी। गोली लगने से उनकी पत्नी बबीता और दो पंडित घायल हो गए, जहां कुछ देर बाद तीनों की मौत हो गई। फायरिंग होते ही पूजा में शामिल अन्य पंडित मौके से भाग निकले। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल की जांच में लगे। वहीं तीनों डेड बॉडी को पुलिस कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। बताया जा रहा कि आरोपी अरविंद सिंह के बड़े भाई गुड्डू सिंह का कई साल पहले आपसी रंजीत को लेकर मर्डर हुआ था, जिसके चलते अरविंद डिप्रेशन में चल रहे थे। जहां उनकी पत्नी शांतिपाठ व अन्य पूजा करवाना चाह रही थीं, जिसका वह विरोध कर रहे थे। इस पूरे घटना को लेकर जिले के कई थाने की फोर्स तथा आजमगढ़ परिक्षेत्र के डीआईजी सुनील कुमार सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉक्टर अनिल कुमार, एस पी ग्रामीण चिराग जैन, एस पी सिटी मधुबन कुमार सिंह व अन्य अधिकारी मौके पर कई घंटे तक मौजूद रहे। घटना की गंभीरता को लेकर वाराणसी जोन के एडीजी नवीन अरोड़ा भी घटनास्थल पर पहुंचे।

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