

गौरव श्रीवास्तव/अमन गुप्ता,अतरौलिया आजमगढ़। नगर पंचायत अतरौलिया में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। सैकड़ों की संख्या में झुंड बनाकर घूम रहे बंदरों के कारण लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। बच्चे स्कूल जाने से डर रहे हैं, महिलाएं छत पर जाने से कतरा रही हैं और दुकानदारों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। अब तक 50 से अधिक लोग बंदरों के हमले में घायल हो चुके हैं, लेकिन वन विभाग और नगर पंचायत एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं।स्थानीय निवासी पवन कुमार ने बताया कि उनकी पत्नी छत पर गई थीं, तभी बंदरों के झुंड ने हमला कर उन्हें घायल कर दिया। सत्यदीप साहू के अनुसार छोटे बच्चे घर से बाहर निकलने और स्कूल जाने से घबरा रहे हैं। कई बच्चों पर भी बंदर हमला कर चुके हैं।नीरज मिश्रा ने बताया कि 50 से 100 बंदरों के झुंड अचानक पहुंच जाते हैं, जिससे कपड़े सुखाना तक मुश्किल हो गया है। व्यापारी अशोक कुमार सोनकर ने कहा कि बंदर दुकानों और घरों में घुसकर सामान का नुकसान करते हैं और ग्राहकों व महिलाओं पर हमला कर देते हैं। राणा सिंह लाखन ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है।स्थानीय लोगों शिवप्रसाद और शिवकुमार सोनकर का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बंदरों के हमलों में घायल लोगों को निजी अस्पतालों में इलाज कराना पड़ रहा है।सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. हरिश्चंद्र के अनुसार पिछले दो महीनों में बंदरों के काटने के मामलों में बढ़ोतरी हुई है और 35 से अधिक लोगों को एंटी-रेबीज वैक्सीन दी जा चुकी है। वहीं 100 शैया अस्पताल के अधीक्षक के मुताबिक जून में 24 और जुलाई में अब तक 20 लोगों को बंदरों के काटने के बाद एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाई गई है।नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी विनय शंकर अवस्थी ने कहा कि बंदरों को पकड़ना नगर पंचायत के कार्यक्षेत्र में नहीं आता। दूसरी ओर वन विभाग के रेंजर वीर बहादुर सिंह का कहना है कि यदि नगर पंचायत आवश्यक संसाधन और सहयोग उपलब्ध कराए तो विभाग रेस्क्यू अभियान चलाकर बंदरों को अन्यत्र स्थानांतरित कर सकता है।दोनों विभागों के बीच जिम्मेदारी तय न होने से नगरवासियों में नाराजगी है। लोगों ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप कर समन्वय के साथ जल्द रेस्क्यू अभियान चलाने और बंदरों के आतंक से राहत दिलाने की मांग की है।
