



गौरव श्रीवास्तव/अमन गुप्ता,आजमगढ़। शहर के पुरानी सब्जी मंडी इलाके में कभी ज्ञान और संस्कृति का केंद्र रही श्री अग्रसेन पुस्तकालय आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। एक समय था जब यहां लोग सरस्वती पूजा करते थे, किताबों के बीच बैठकर ज्ञान अर्जित करते थे और सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन होता था। लेकिन वर्षों की अनदेखी और उपेक्षा के कारण यह ऐतिहासिक पुस्तकालय अब खंडहर में तब्दील हो चुका है। स्थिति यह हो गई कि पुस्तकालय भवन की दीवारों और आसपास के क्षेत्र का इस्तेमाल खुलेआम शौचालय के रूप में होने लगा। घनी आबादी और व्यस्त बाजार के बीच स्थित इस स्थल पर दिनभर लोग खुले में शौच करते दिखाई देते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि आसपास के दुकानदारों, ग्राहकों और राहगीरों के लिए नगर पालिका की ओर से कोई सार्वजनिक शौचालय या मूत्रालय की व्यवस्था नहीं की गई है, जिसके चलते लोग मजबूरी में इस स्थान का उपयोग करते हैं। वहीं कुछ लोग आदतन भी यहां गंदगी फैलाते हैं। स्थानीय नागरिकों के अनुसार यहां नियमित सफाई व्यवस्था भी नहीं है, जिससे पूरे इलाके में दुर्गंध और अस्वस्थ वातावरण बना रहता है। लोगों ने संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका भी जताई है। बताया जाता है कि इस पुस्तकालय का संचालन अग्रवाल समाज द्वारा किया जाता था, लेकिन संगठन की अनदेखी के चलते इसकी स्थिति लगातार खराब होती चली गई। हालांकि अब पुस्तकालय के पुनरुद्धार को लेकर समाज के लोगों ने पहल शुरू कर दी है। हाल ही में अग्रवाल समाज की नई कार्यकारिणी का गठन हुआ है। इसके बाद आयोजित बैठक में श्री अग्रसेन पुस्तकालय के पुनरुद्धार को लेकर सामूहिक प्रयास करने का निर्णय लिया गया। इसी क्रम में शनिवार सुबह अग्रवाल समाज के कई प्रमुख लोग पुस्तकालय भवन पहुंचे और स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अतुल अग्रवाल, सुधीर कुमार अग्रवाल, सुनील अग्रवाल, मनीष रतन अग्रवाल, अशोक अग्रवाल सहित समाज के कई वरिष्ठ लोग मौजूद रहे। सभी ने पुस्तकालय के पुनर्निर्माण कार्य को जल्द शुरू करने की बात कही। समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि यहां आधुनिक सुविधाओं से युक्त एक नई डिजिटल लाइब्रेरी बनाई जाएगी, जिसमें पुराने पुस्तकालय की ऐतिहासिक पहचान और महत्व को भी संरक्षित रखा जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस बार किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाएगी और यह स्थान फिर से ज्ञान एवं सामाजिक जागरूकता का केंद्र बनेगा।
