
गौरव श्रीवास्तव/अमन गुप्ता,आजमगढ़। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा प्रस्तावित नए नियमों एवं बिल को लेकर सवर्ण समाज और छात्र संगठनों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में सवर्ण छात्रों के हितों की रक्षा की मांग को लेकर सवर्ण आर्मी भारत के नेतृत्व में जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन के माध्यम से यूजीसी के नए प्रावधानों को वापस लेने अथवा उनमें व्यापक संशोधन की मांग की गई। ज्ञापन में कहा गया कि प्रस्तावित नियमों के लागू होने से सामान्य वर्ग के मेधावी छात्रों का भविष्य गंभीर खतरे में पड़ सकता है। चयन प्रक्रिया में योग्यता (मेरिट) की अनदेखी की आशंका जताते हुए कहा गया कि इससे मेहनती और प्रतिभाशाली छात्रों के साथ अन्याय होगा। छात्र प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि नए नियमों के चलते सामान्य श्रेणी के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा, शोध और अकादमिक अवसर सीमित हो सकते हैं, जिससे उनके करियर विकल्प संकुचित होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सवर्ण समाज का एक बड़ा वर्ग आर्थिक रूप से मध्यम एवं कमजोर स्थिति में है, ऐसे में शिक्षा नीति में असंतुलन उन्हें प्रतिस्पर्धा से बाहर कर सकता है। प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि देश में मेधावी छात्रों को उनकी योग्यता के अनुरूप अवसर और सम्मान नहीं मिला, तो ब्रेन ड्रेन की समस्या और गंभीर होगी, जिसका सीधा नुकसान प्रदेश और देश को उठाना पड़ेगा।
