प्रयागराज में संतों के साथ दुर्व्यवहार निंदनीय, सरकार दबाना चाहती है विपक्ष की आवाज: मनोज कुमार सिंह

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गौरव श्रीवास्तव/अमन गुप्ता, प्रयागराज में मौनी महाराज और अन्य संतों के धरना प्रदर्शन तथा उनके साथ हुए कथित दुर्व्यवहार को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। इस मुद्दे पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, आजमगढ़ के जिला उपाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।​शंकराचार्य के अपमान पर जताया रोष​मनोज कुमार सिंह ने कहा कि शंकराचार्य जैसी महान विभूति के साथ प्रशासन द्वारा किया गया अभद्र व्यवहार बेहद निंदनीय है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए संतों की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा, “शंकराचार्य को कोर्ट नहीं बनाता, उन्हें उनकी परंपरा और पीठ की मान्यता बनाती है। प्रशासन का उन्हें नोटिस देना कि वे शंकराचार्य नहीं हैं, उनके अधिकारों का हनन है।”​प्राचीनता और परंपराओं के साथ खिलवाड़ का आरोप​वीडियो में सिंह ने मणिकर्णिका घाट और अन्य पौराणिक स्थलों के साथ हो रही छेड़छाड़ पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सौंदर्यकरण के नाम पर घाटों की प्राचीनता और वहां स्थित मूर्तियों व शिवलिंगों को नष्ट किया जा रहा है, जो हमारी सांस्कृतिक धरोहर के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने आशंका जताई कि इन सरकारी कदमों के पीछे घाटों का निजीकरण करने की मंशा हो सकती है।​महंगाई और मनरेगा पर घेरा​स्थानीय मुद्दों और अर्थव्यवस्था पर चर्चा करते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि वर्तमान में महंगाई चरम पर है। डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार गिर रहा है, लेकिन सरकार का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। उन्होंने मनरेगा योजना में किए जा रहे बदलावों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सरकार धीरे-धीरे इस योजना को खत्म करने की साजिश रच रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का बड़ा संकट पैदा हो जाएगा।​”चंदा दो, धंधा लो” की नीति​सरकार पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान शासन व्यवस्था केवल उद्योगपतियों के लिए काम कर रही है। सरकार की नीति अब केवल “चंदा दो और धंधा लो” तक सीमित रह गई है, जिसमें आम नागरिक और गरीब मजदूर पिस रहा है। उन्होंने मांग की कि प्रयागराज प्रशासन को अपनी गलती स्वीकारते हुए संतों से माफी मांगनी चाहिए।

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