

गौरव श्रीवास्तव,आजमगढ़। पुलिस लाइन, जनपद आजमगढ़ में शुक्रवार को 596 महिला रिक्रूट आरक्षियों के आधारभूत प्रशिक्षण के दौरान एक विशेष विधिक एवं व्यावहारिक मार्गदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आजमगढ़ सत्यवीर सिंह ने महिला अपराधों से जुड़े कानून, न्यायिक प्रक्रिया तथा पुलिस की भूमिका पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने कहा कि किसी भी पीड़िता के थाने आने पर उसके साथ संवेदनशील, सम्मानजनक और सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार करना पुलिस का प्रथम कर्तव्य है। पीड़िता का विश्वास ही न्यायिक प्रक्रिया की सफलता की सबसे मजबूत आधारशिला है। उन्होंने कोर्ट मुहर्रिर एवं कोर्ट पैरोकार की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समयबद्ध केस डायरी, साक्ष्यों का सटीक प्रस्तुतीकरण, अभिलेखों का सुव्यवस्थित संधारण और गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। पुलिस और न्यायालय के बीच बेहतर समन्वय से ही मामलों का प्रभावी निस्तारण संभव है। ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत उन्होंने बताया कि विवेचनात्मक कमियों को दूर कर मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत करने से अपराधियों को शीघ्र और सुनिश्चित सजा दिलाई जा सकती है। यह अभियान न्यायिक परिणामों को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। कार्यक्रम के दौरान बलात्कार, महिला लैंगिक उत्पीड़न, बहला-फुसलाकर भगाई गई पीड़िता के मामलों में मानवीय दृष्टिकोण, बयान दर्ज करने की विधिक प्रक्रिया तथा नारी सशक्तिकरण के महत्व पर भी विस्तृत चर्चा की गई। इस अवसर पर दिसंबर 2025 में आयोजित इनडोर परीक्षा में टॉप-10 स्थान प्राप्त करने वाली 42 महिला रिक्रूट आरक्षियों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सत्यवीर सिंह एवं क्षेत्राधिकारी लाइन/नगर शुभम तोदी द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
