

गौरव श्रीवास्तव,आजमगढ़। मऊ जिले के मोहम्मदाबाद गोहना के अतरारी गांव निवासी गणेश यादव और रीना यादव की शादी को तेईस साल हो चुके थे। घर में सब कुछ था प्यार, समझ, सम्मान—बस एक चीज़ की कमी थी, जिसकी टीस हर दिन उन्हें चुपचाप रुला देती थी। एक संतान हर तीज-त्योहार, हर रिश्तेदार की पूछताछ, और हर बच्चे की किलकारी उनके दिल में एक खालीपन छोड़ जाती। वर्षों तक उन्होंने कई जगह इलाज कराया, मंदिरों के चक्कर लगाए, दुआएँ मांगीं, पर हर बार निराशा ही हाथ लगी। धीरे-धीरे उम्मीद भी थकने लगी थी। इसी बीच किसी परिचित ने उन्हें आजमगढ़ शहर के लछिरामपुर हीरापट्टी के विजय सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में स्थित मातृत्व आईवीएफ की जानी-मानी स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रजनी तिवारी के बारे में बताया। पहले तो वे हिचकिचाए—“अब क्या फायदा?”—लेकिन फिर भी एक आख़िरी उम्मीद लेकर उनके हॉस्पिटल पहुँचे। डॉ. रजनी तिवारी ने न सिर्फ़ उनकी मेडिकल रिपोर्ट्स ध्यान से देखीं, बल्कि उनके मन की पीड़ा को भी समझा। उन्होंने बड़े धैर्य और संवेदनशीलता से कहा,“इलाज सिर्फ़ दवाओं से नहीं होता, भरोसे से भी होता है।”कई महीनों तक जाँच, इलाज और परामर्श चलता रहा। हर बार डॉ. तिवारी उन्हें हौसला देती—“हार मत मानिए।” और फिर एक दिन रिपोर्ट हाथ में थी और आँखों में आँसू इस बार खुशी के। रीना माँ बनने वाली थी। जब उस घर में पहली बार एक नन्ही किलकारी गूँजी, तो लगा जैसे वर्षों की तपस्या सफल हो गई हो। रीना उस नन्हे चमत्कार को सीने से लगाए बस मुस्कुरा रही थी। डॉ रजनी तिवारी ने बताया रीना की डिलीवरी आईवीएफ से हुई है। प्रेगनेंसी के दौरान रीना की तबीयत बिगड़ने पर साढ़े छह महीने में ही 28 नवंबर 2025 को सिजेरियन डिलीवरी करनी पड़ी। जब बच्ची ने जन्म लिया तो 600 ग्राम की थी । अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अक्षी सिंह की बच्ची के प्रति कड़ी मेहनत के बाद आज बच्ची 950 ग्राम की है। जो बिल्कुल स्वस्थ है। जच्चा बच्चा दोनों को डिस्चार्ज किया जा रहा है। वर्षों से संतान सुख से वंचित महिलाओं को संदेश देते हुए डॉक्टर रजनी तिवारी ने कहा की समय पर इलाज कराया जाए तो सफलता जरूर मिलती है। वहीं अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अक्षी सिंह ने बताया कि जब बच्ची हुई तो 600 ग्राम की थी। करीब दो सप्ताह तक एनआईसीयू में रखने के बाद आज बच्ची 950 ग्राम की है और बिल्कुल स्वस्थ है। शादी के 23 साल बाद मां बनने वाली रीना यादव की खुशी का ठिकाना नहीं है। उन्होंने डॉक्टर रजनी तिवारी और डॉक्टर अक्षी सिंह को अथक प्रयास के लिए आभार जताया। उन्होंने बताया कि कई जगह इलाज कराने के बाद भी बच्चा नहीं हो रहा था लेकिन डॉक्टर रजनी तिवारी के इलाज से उनकी सुनी गोद भर गई।
