₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI लेनदेन पर 0.4% MDR शुल्क, व्यापारियों में चिंता, कैश लेनदेन बढ़ने की आशंका

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गौरव श्रीवास्तव/अमन गुप्ता,आजमगढ़। केंद्र सरकार के नए नोटिफिकेशन के बाद ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू किए जाने की घोषणा को लेकर जनता और व्यापारियों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। नया नियम 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने की बात कही गई है।प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ₹2,000 तक के UPI लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं होगा, जबकि ₹2,000 से अधिक के कुछ चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाया जाएगा। इसकी अधिकतम सीमा ₹300 निर्धारित की गई है। सरकार का कहना है कि 96 प्रतिशत से अधिक UPI लेनदेन इस शुल्क के दायरे से बाहर रहेंगे।हालांकि, छोटे और मध्यम व्यापारियों में इसको लेकर चिंता है। व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल पेमेंट पर अतिरिक्त शुल्क लगने से उनके मुनाफे पर असर पड़ सकता है। कुछ व्यापारियों का कहना है कि वे ग्राहकों से UPI के बजाय नकद भुगतान लेने पर विचार कर रहे हैं।वहीं, आम लोगों के बीच भी यह आशंका है कि व्यापारी यदि शुल्क का बोझ ग्राहकों पर डालते हैं तो बड़े डिजिटल भुगतान महंगे हो सकते हैं। दूसरी ओर, कुछ लोगों का मानना है कि ₹2,000 तक के लेनदेन पर शुल्क नहीं होने से रोजमर्रा के छोटे भुगतान प्रभावित नहीं होंगे।

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