सरकारी दावों की खुली पोल: कागजों पर विकास, धरातल पर संकट

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गौरव श्रीवास्तव/अमन गुप्ता,अतरौलिया, आजमगढ़। मानसून से पहले ही विकासखंड क्षेत्र की गोविंदपुर ग्राम पंचायत में जल निकासी और सफाई व्यवस्था की बदहाली को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में न तो पर्याप्त नालियों का निर्माण कराया गया है और न ही नियमित सफाई की व्यवस्था है, जिसके चलते बारिश के दौरान जलभराव की गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाती है।ग्रामीणों का कहना है कि सरकार गांवों के विकास और स्वच्छता पर करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करती है, लेकिन गोविंदपुर में ये दावे धरातल पर नजर नहीं आते। गांव की निवासी सीमा ने बताया कि वह पिछले 10 वर्षों से जर्जर झोपड़ी में परिवार के साथ रह रही हैं, लेकिन अब तक उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका। बरसात के मौसम में उनके परिवार के सामने सुरक्षित आवास का संकट खड़ा हो जाता है।ग्रामीण राधेश्याम विश्वकर्मा के अनुसार गांव में नालियों के अभाव में बारिश का पानी खेतों में भर जाता है, जिससे किसानों के बीच विवाद की स्थिति पैदा हो जाती है। कमलावती ने बताया कि जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण जगह-जगह पानी जमा रहता है और लोगों को हाथों से पानी निकालना पड़ता है।पूनम ने बताया कि कई बार अधिकारियों द्वारा आवास के लिए निरीक्षण किया गया, लेकिन आज तक उन्हें किसी योजना का लाभ नहीं मिला। वहीं विवेचन मौर्य, जयराम विश्वकर्मा और कोमई ने आरोप लगाया कि सफाईकर्मी नियमित रूप से गांव नहीं आते और जो नालियां बनी भी हैं, वे लंबे समय से जाम पड़ी हैं। इससे घरों और सड़कों के सामने गंदा पानी जमा रहता है।ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि गांव में बनी कई नालियों पर सुरक्षा के लिए पटिया नहीं रखी गई है, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान पर विकास कार्यों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए नाली निर्माण, नियमित सफाई और स्थायी जल निकासी व्यवस्था की मांग की है।इस संबंध में खंड विकास अधिकारी आलोक कुमार ने बताया कि मामले की जानकारी मिली है। संबंधित पंचायत को निर्देश देकर जांच कराई जाएगी तथा गांव में साफ-सफाई और जल निकासी की समस्या के समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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