शासन रोक के बावजूद 10 शिक्षकों को 51 लाख वेतन भुगतान, समाज कल्याण अधिकारी ने खुद को बताया बेकसूर

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गौरव श्रीवास्तव/अमन गुप्ता,आजमगढ़ में समाज कल्याण विभाग एक बार फिर वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सवालों के घेरे में है। शासन द्वारा वेतन भुगतान पर रोक लगाए जाने के बावजूद 10 शिक्षकों को करीब 51.46 लाख रुपये का भुगतान किए जाने का मामला सामने आया है। शिकायत के बाद हुई जांच में अनियमितता की पुष्टि हुई है, जिसके बाद जिलाधिकारी ने कार्रवाई की संस्तुति के साथ रिपोर्ट शासन को भेज दी है।मामले की शिकायत अरुण कुमार सिंह ने मंडलायुक्त से की थी। इसके बाद मंडलायुक्त के निर्देश पर जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की। समिति में जिला विकास अधिकारी और मुख्य कोषाधिकारी को भी शामिल किया गया था।सीडीओ परीक्षित खटाना के अनुसार, जांच पूरी कर रिपोर्ट डीएम को सौंप दी गई है। हालांकि उन्होंने रिपोर्ट की विस्तृत जानकारी साझा करने से इनकार किया। सूत्रों के मुताबिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि कुछ सहायक अध्यापकों की नियुक्तियां नियमों के विपरीत थीं और शासन ने उनके वेतन भुगतान पर रोक लगा रखी थी, इसके बावजूद भुगतान कर दिया गया।जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित प्रकरण पहले से ही उच्च न्यायालय में विचाराधीन रहे हैं। इसके बावजूद जनवरी 2026 में विभाग ने कथित तौर पर कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए 10 शिक्षकों को वेतन जारी कर दिया। इतना ही नहीं, मार्च 2026 में न्यायालय में दाखिल काउंटर में इस भुगतान का उल्लेख भी नहीं किया गया।मामले की पृष्ठभूमि में 2014 के बाद हुई नियुक्तियों पर उठे सवाल भी जुड़े हैं। जौनपुर की विधायक सुषमा पटेल द्वारा विधानसभा में उठाए गए मुद्दे के बाद जांच में 42 शिक्षक फर्जी पाए गए थे। इसके बाद 2021 में वेतन पर रोक लगाई गई थी। बाद में अलग-अलग चरणों में 17 और फिर 25 शिक्षकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।दिसंबर 2025 में शासन ने इन नियुक्तियों के अनुमोदन भी निरस्त कर दिए थे, बावजूद इसके भुगतान किया जाना विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।वहीं, जिला समाज कल्याण अधिकारी राजेश चौधरी ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि वेतन का भुगतान माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में किया गया है। उन्होंने किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार या पैसे लेकर काम करने के आरोपों को खारिज किया। साथ ही उन्होंने कहा कि उन्हें अब तक किसी जांच रिपोर्ट में दोष सिद्ध होने की आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है।

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