

गौरव श्रीवास्तव/अमन गुप्ता, आजमगढ़।महराजगंज ब्लाक में साढ़े चार वर्षों के कार्यकाल के बावजूद विकास कार्यों की तस्वीर क्या है—इस सवाल पर ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि पारसनाथ यादव पत्रकारों के सामने घिरते नज़र आए। जब उनसे उनके कार्यकाल के विकास कार्यों का श्वेत पत्र जारी करने का सीधा सवाल किया गया, तो वे स्पष्ट जवाब देने से बचते दिखे और इधर-उधर की बातें करते रहे। लगातार सवालों के दबाव में ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि ने यह चौंकाने वाली स्वीकारोक्ति की कि आज भी ब्लाक की कई ग्राम सभाएँ विकास कार्यों से वंचित हैं। हालांकि, इसके बावजूद वे अपने पूरे कार्यकाल की उपलब्धियों का कोई लिखित विवरण, ठोस आंकड़ा या प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके। श्वेत पत्र जारी न करने के सवाल पर ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि चुनावी और राजनीतिक जवाब देते नजर आए, लेकिन विकास की जमीनी हकीकत पर कोई स्पष्ट स्थिति नहीं रख पाए। उन्होंने यह भी माना कि संसाधनों की कमी के चलते सभी ग्राम सभाओं में समान रूप से विकास कार्य नहीं हो सका।
इस स्वीकारोक्ति के बाद क्षेत्र में सवालों का तूफान खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई ग्राम सभाओं में आज भी सड़क, नाली, आवास, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं का गंभीर अभाव बना हुआ है। लोगों ने मांग की है कि ब्लाक स्तर पर कराए गए सभी कार्यों का श्वेत पत्र सार्वजनिक किया जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। वहीं, विपक्षी जनप्रतिनिधियों ने इस मुद्दे को लेकर ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि पर तीखा हमला बोला। उनका कहना है कि यदि वास्तव में व्यापक विकास हुआ है, तो श्वेत पत्र जारी करने से परहेज क्यों? विपक्ष का आरोप है कि श्वेत पत्र से बचना कहीं न कहीं विकास कार्यों में असमानता और पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है। कुल मिलाकर, श्वेत पत्र जारी न करना और कुछ ग्राम सभाओं के विकास से वंचित होने की स्वीकारोक्ति ने ब्लाक प्रमुख की विकास नीति और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि ग्राम सभाओं में विकास की असमानता को लेकर जनता और पार्टी आगामी चुनाव में किस करवट ऊँट बैठाती है।
