

“ये डंडा हथियार नहीं, अनुशासन है” – अतरौलिया में गूंजा राजभर का भाषण, सड़कों पर उतरे हजारों युवा
गौरव श्रीवास्तव/अमन गुप्ता,आज़मगढ़ जिले के अतरौलिया विधानसभा क्षेत्र के खजुरी स्थित बड़े मैदान में राष्ट्रीय सुहेलदेव सेना के तत्वावधान में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिले के साथ-साथ पूर्वांचल के कई जनपदों से बड़ी संख्या में युवा पहुंचे। आयोजन का उद्देश्य युवाओं को अनुशासन, शारीरिक प्रशिक्षण और शिक्षा के प्रति जागरूक करना बताया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर रहे। इस दौरान युवाओं ने “जय सुहेलदेव” के नारे लगाए। राजभर ने सुहेलदेव सेना के सदस्यों को पीले रंग का मोटा डंडा देते हुए कहा कि इसका उद्देश्य सुरक्षा और अनुशासन का प्रतीक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई आग्नेय हथियार नहीं है, बल्कि संगठन और एकजुटता का संदेश देने का माध्यम है। राजभर ने कहा कि राष्ट्रीय सुहेलदेव सेना का गठन इसलिए किया गया है ताकि समाज के बच्चों और अभिभावकों को सही दिशा दिखाई जा सके। उन्होंने कहा कि आज 60 से 70 प्रतिशत बच्चों को यह नहीं पता होता कि सिपाही, डॉक्टर या इंजीनियर बनने के लिए कौन-सी पढ़ाई जरूरी है। इसी कमी को दूर करने के लिए सेना के माध्यम से बच्चों को शारीरिक प्रशिक्षण, समय पर उठने, दौड़-व्यायाम और करियर से जुड़ी जानकारी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि 13 से 15 वर्ष की उम्र के बच्चों को अभी से सही विषय चुनने की सलाह दी जा रही है ताकि आगे चलकर वे असफल न हों। कार्यक्रम में मौजूद कैबिनेट मंत्री के पुत्र डॉ. अरविन्द राजभर ने भी युवाओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा, प्रशिक्षण और सही मार्गदर्शन के जरिए राजभर समाज के बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर और अधिकारी बन सकते हैं। इससे समाज को मजबूती मिलेगी।अपने संबोधन में ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल के दौरान आरक्षण और नियुक्तियों को लेकर पहले लगाए गए आरोपों को दोहराया और सपा नेताओं द्वारा लगाए गए खंडन को गलत बताया। राजभर ने कहा कि अब प्रदेश में सपा की सरकार बनने वाली नहीं है और 2047 तक एनडीए ही सत्ता में रहेगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस कार्यक्रम के जरिए ओम प्रकाश राजभर ने एक तरफ विपक्ष को अपनी ताकत दिखाई, तो दूसरी ओर सत्तारूढ़ गठबंधन में अपनी भूमिका और दबदबा भी स्पष्ट किया। अतरौलिया से हुआ यह आयोजन 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर पूर्वांचल की राजनीति में अहम संकेत माना जा रहा है।
