

गौरव श्रीवास्तव/अमन गुप्ता,आजमगढ़। समाजवादी पार्टी के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले पर नूरूल हूदा राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के प्रदेश अध्यक्ष यूथ ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने PDA का नया अर्थ “P-परिमल, D-धनराज, A-आओ” बताते हुए समाजवादी पार्टी से मुस्लिम और पसमांदा समाज की राजनीतिक भागीदारी पर सवाल उठाए।उन्होंने कहा कि 16 प्रतिशत पसमांदा समाज के वोट का इस्तेमाल राजनीतिक दल करते हैं, लेकिन जब राजनीतिक प्रतिनिधित्व की बात आती है तो उन्हें पीछे कर दिया जाता है। उन्होंने दावा किया कि राज्यसभा और संसद में मुस्लिम, दलित मुस्लिम जातियों तथा पसमांदा समाज को अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।प्रदेश अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि PDA में OBC मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी कहां है? उन्होंने कहा, “हम वोट बैंक बने हैं तो अच्छा लगता है, लेकिन जब राजनीतिक भागीदारी की बात करते हैं तो मिर्ची क्यों लगती है? जिसको वोट देंगे, उसी से हिस्सेदारी मांगने का हक भी हमारा है।”उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई केवल सपा, बसपा या कांग्रेस से नहीं है, बल्कि सभी सेक्युलर राजनीतिक दलों से पसमांदा समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की मांग है। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा से वोट मांगा जाता है तो उससे भी हिस्सेदारी मांगी जाएगी और सेक्युलर दलों को भी अपने भीतर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना होगा।उन्होंने परिवारवाद का आरोप लगाते हुए कहा कि बार-बार एक ही लोगों को राज्यसभा भेजने के बजाय पसमांदा और मुस्लिम दलित समाज के लोगों को भी अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने अखिलेश यादव से राजनीतिक भागीदारी के मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ने की मांग की।प्रदेश अध्यक्ष ने चेतावनी देते हुए कहा कि “2027 में हम जवाब देने के लिए तैयार बैठे हैं।” उन्होंने कहा कि 17 मुस्लिम जातियों के प्रतिनिधित्व को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं और अब समाज राजनीतिक भागीदारी के मुद्दे पर अपनी आवाज बुलंद करेगा।उन्होंने अंत में कहा कि “हमारे वोट, नोट और सपोर्ट से सत्ता तक पहुंचने वालों को अब हमारे राजनीतिक अधिकार और हिस्सेदारी पर भी बात करनी होगी।”
