सर्पदंश पर घबराएं नहीं, सीधे अस्पताल पहुंचें; झाड़-फूंक में समय न गंवाएं: डॉ. दिनेश सिन्हा

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गौरव श्रीवास्तव/अमन गुप्ता,अतरौलिया। बरसात के मौसम में सांप निकलने की बढ़ती घटनाओं के बीच अमर शहीद राजा जयलाल सिंह 100 शैय्या संयुक्त जिला चिकित्सालय के चिकित्सकों ने लोगों से सर्पदंश की स्थिति में बिना घबराए तुरंत अस्पताल पहुंचने की अपील की है।मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. दिनेश प्रसाद सिन्हा ने बताया कि अस्पताल की इमरजेंसी में एंटी-स्नेक वेनम (एएसवी) पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। जरूरत को देखते हुए 50 अतिरिक्त वायल मंगाने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पताल की 24 घंटे संचालित इमरजेंसी में विशेषज्ञ चिकित्सक तैनात रहते हैं। उन्होंने कहा कि सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र, ओझा या झोलाछाप के चक्कर में पड़कर समय बर्बाद करना जानलेवा साबित हो सकता है। उन्होंने बताया कि एंटी-स्नेक वेनम की सुविधा सभी सीएचसी और जिला अस्पतालों में भी निःशुल्क उपलब्ध है।फिजिशियन डॉ. राजन वर्मा ने बताया कि क्षेत्र में अधिकांश सांप जहरीले नहीं होते, लेकिन डर की वजह से मरीज की हालत बिगड़ सकती है। उन्होंने कहा कि करैत के काटने पर जहर का असर 4 से 12 घंटे बाद भी दिखाई दे सकता है, इसलिए मरीज को कम से कम 24 घंटे चिकित्सकीय निगरानी में रखना जरूरी है।चिकित्सकों ने सलाह दी कि सर्पदंश होने पर घाव पर चीरा न लगाएं, न ही प्रभावित अंग के ऊपर रस्सी या कपड़ा कसकर बांधें। जिस अंग पर सांप ने काटा हो, उसे स्थिर रखें, घाव को साफ पानी और साबुन से धोकर बिना देरी किए अस्पताल पहुंचें। चिकित्सकों का कहना है कि समय पर उपचार ही सर्पदंश से होने वाली मौतों को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है।

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