



गौरव श्रीवास्तव/अमन गुप्ता,आजमगढ़।अपराध नियंत्रण के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारियों का भी बखूबी निर्वहन कर रही थाना अतरौलिया पुलिस ने एक बार फिर अपनी संवेदनशील कार्यशैली से लोगों का दिल जीत लिया। दहेज उत्पीड़न और आपसी विवाद के चलते टूटने की कगार पर पहुंचे एक परिवार को पुलिस ने सूझबूझ और काउंसलिंग के जरिए फिर से एक कर दिया। थाने परिसर में पति-पत्नी ने एक-दूसरे को माला पहनाई, मिठाई खिलाई और साथ रहने का संकल्प लेकर खुशी-खुशी घर लौट गए। पुलिस की इस पहल की क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है।ग्राम नन्दना निवासी रामअचल पुत्र स्वर्गीय जानकी राम ने थाना अतरौलिया में प्रार्थना पत्र देकर अपनी पुत्री सुजाता भारती के वैवाहिक जीवन में चल रहे विवाद की शिकायत की थी। उन्होंने बताया कि लगभग 12 से 15 वर्ष पूर्व सुजाता की शादी उपटापार बांसगांव निवासी संतोष पुत्र अच्छेलाल के साथ हुई थी। दोनों का एक बच्चा भी है, लेकिन शादी के कुछ समय बाद से ही दहेज में रुपये और गाड़ी की मांग को लेकर विवाद शुरू हो गया था। आरोप था कि दहेज की मांग पूरी न होने पर सुजाता को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। लगातार हो रहे विवाद और मारपीट से परेशान होकर वह पिछले करीब पांच महीनों से मायके में रह रही थी। कई बार पंचायत और समझौते के प्रयास भी हुए, लेकिन बात नहीं बन सकी। अंततः पीड़ित पिता ने पुलिस से न्याय की गुहार लगाई।मामले को गंभीरता से लेते हुए थाना प्रभारी देवेंद्र नाथ दुबे, उपनिरीक्षक मनीष विश्वकर्मा और कां0 मनीष यादव ने दोनों पक्षों को थाने बुलाकर बातचीत की। पुलिस अधिकारियों ने कानूनी कार्रवाई के बजाय पहले परिवार को बचाने की पहल की और दोनों को रिश्ते की अहमियत समझाते हुए आपसी मतभेद दूर करने का प्रयास किया। पुलिस की समझाने और काउंसलिंग का असर यह हुआ कि पति-पत्नी पुरानी कड़वाहट भुलाकर फिर से साथ रहने को तैयार हो गए। इसके बाद थाने परिसर में ही दोनों ने एक-दूसरे को माला पहनाई और मिठाई खिलाकर नए सिरे से जीवन शुरू करने का भरोसा दिलाया।अतरौलिया पुलिस की इस मानवीय पहल से न सिर्फ एक परिवार बिखरने से बच गया, बल्कि एक मासूम बच्चे को भी माता-पिता का प्यार दोबारा मिल गया। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि पुलिस की ऐसी संवेदनशील कार्यशैली समाज में सकारात्मक संदेश देने का काम कर रही है।
