

28 को होगा विसर्जन,नगर में सजेंगी दो दर्जन से अधिक भव्य प्रतिमाएं
गौरव श्रीवास्तव/अमन गुप्ता,अतरौलिया आजमगढ़। नगर पंचायत अतरौलिया में आगामी दुर्गा पूजा और ऐतिहासिक तीन दिवसीय मेले को लेकर तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू हो गई हैं। दशमी के पांचवें दिन यानी शरद पूर्णिमा (25 अक्टूबर) से शुरू होने वाला यह प्रसिद्ध मेला 25, 26 और 27 अक्टूबर तक चलेगा, जबकि 28 अक्टूबर को माता रानी की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा। पूरे नगर क्षेत्र में लगभग दो दर्जन से अधिक स्थानों पर मां भगवती की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की जा रही हैं।स्थानीय नागरिक भक्तवीर मनीष सोनी ने बताया कि नगर के रामबरन चौक, हनुमानगढ़ी, दुर्गा चौक, शंकर तिरमुहानी, जायसवाल तिरमुहानी, बब्बर चौक, केसरी सिंह चौक, बुधनियां रोड और डाकखाना रोड समेत करीब दो दर्जन से अधिक स्थानों पर प्रतिमाएं स्थापित की जा रही हैं। कई स्थानों पर 8 फीट ऊंची प्रतिमाएं और आकर्षक 3D पंडाल तैयार किए जा रहे हैं। वहीं जय बजरंग दल (हनुमानगढ़ी सेवा समिति) के शिवम गुप्ता ने बताया कि छोटे-छोटे बच्चे और युवा पिछले दो महीने से लगातार जागकर भव्य पंडाल का निर्माण कर रहे हैं। पूर्णिमा के दिन माता रानी का पट खुलते ही दर्शन-पूजन शुरू हो जाएगा।व्यापार मंडल अध्यक्ष हिमांशु विनायकर ने बताया कि अतरौलिया का यह मेला 50 वर्षों से भी अधिक पुराना और ऐतिहासिक है, जिसमें व्यापारियों का विशेष सहयोग रहता है। इस मेले में मुबारकपुर, कप्तानगंज, अतरैठ, बूढ़नपुर, कोयलसा और बढ़या सहित दूर-दराज से व्यापारी दुकानें लगाने पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि गणेश तिरमुहानी पर नौ दुर्गा स्वरूप, हनुमानगढ़ी, मुसाफिर चौक और बाबा बालकदास कुटी पर विशेष झांकियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। मेले में प्रतिदिन 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने का अनुमान है। आसपास के 10 से 15 किलोमीटर क्षेत्र से ग्रामीण रात में मेला देखने आते हैं, जिसके चलते मेला देर रात 2 से 3 बजे तक संचालित होता है।मेले को शांतिपूर्ण और सकुशल संपन्न कराने के लिए पुलिस-प्रशासन और व्यापार मंडल के बीच पीस कमेटी की बैठक आयोजित की गई। बैठक में उपजिलाधिकारी (एसडीएम) बूढ़नपुर, क्षेत्राधिकारी (सीओ) और थानाध्यक्ष अश्वनी कुमार दुबे मौजूद रहे। अधिकारियों ने व्यापारियों और श्रद्धालुओं को सुरक्षा का पूर्ण आश्वासन दिया है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि रात में दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए मेले को समय से पहले जबरन बंद न कराया जाए।
