

गौरव श्रीवास्तव/अमन गुप्ता,आजमगढ़ जिले में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह कार्यक्रम में 800 से अधिक जोड़ों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया था। इन वैवाहिक जोड़ों का वैदिक मंत्रों के साथ अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे दिलवाए गए। कार्यक्रम में उपस्थित प्रदेश सरकार के मंत्री अनिल राजभर ने वर वधु को आशीर्वाद भी दिया। सरकार के मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लिया है। विगत 9 वर्षों में लाखों बेटियों का विवाह सकुशल संपन्न कराया जा चुका है। 2022 के विधानसभा चुनाव में सरकार ने शादी अनुदान बढ़ाने का फैसला लिया था। 2017 में शादी का अनुदान 21000 था जो आज बढ़कर 64000 हो गया है। इसके साथ ही हर जोड़े पर सरकार की तरफ से 100000 का खर्च किया जाता है। आने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सरकार के मंत्री अनिल राजभर का कहना है कि 2017 की पुनरावृत्ति होगी और 2027 में एक बार फिर से हम सरकार बनाने जा रहे हैं। समाजवादी पार्टी पर निशाना चाहते हुए सरकार के मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव लखनऊ में बैठकर ट्विटर ट्विटर खेल रहे हैं। सोशल मीडिया तक ही उनकी राजनीति सीमित हो गई है। सच्चाई वह भी जानते हैं इसलिए समाजवादी पार्टी को जब वह हारेंगे तो क्या बहाना बनाएंगे। उसकी भूमिका अभी से ही तैयार कर रहे हैं।अभी से ही सरकार और चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा किया जा रहा है। जनता सब कुछ समझ और जान रही है। ऐसे में आने वाले विधानसभा चुनाव में एक बार फिर से प्रदेश की जनता भाजपा के साथ खड़ी होगी। जिले में 12 अक्टूबर को भी मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह हुआ था जिसमें 536 जोड़ों का विवाह कराया गया था। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह कार्यक्रम में शामिल हुए प्रति जोड़ो पर एक लाख रुपये खर्च किये जा रहे हैं। जिसमें विवाहोपरान्त कन्या के खाते में 64 हजार रुपये आरटीजीएस के माध्यम से भेजी जाती है। इस सामूहिक विवाह में प्रति जोड़ों को 21 हजार रुपये का सामान जिसमें 5 साड़ी का सेट, चुनरी, दूल्हे को पैन्ट-शर्ट का कपड़ा, गमछा, दीवाल घड़ी, प्रेसर कुकर, कढ़ाई, 8 किलो स्टेनलेस स्टील का डिनर सेट, ट्रॉली बैग, सीलिग फैन, प्रेस, दो गद्दे, डबल बेड की चादर, 10 ग्राम बिछिया समेत अन्य सामान सम्मलित हैं। जबकि इस कार्यक्रम में आयोजन के दौरान 15000 रुपये खाने-पीने, टेन्ट एवं अन्य व्यवस्थाओं के आयोजन में व्यय किये जाते हैं।
